Bond Market
Bond Market पर ताज़ा खबरें, व्याख्या और विश्लेषण। अर्थ वाणी पर 8 खबरें ट्रैक की जा रही हैं।
ग्राफ में जुड़े हुए
Bond Market पर ताज़ा
वैश्विक शांति के बीच भारतीय बॉन्ड में तेज़ी, लेकिन खाद्य कीमतों पर मंडरा रहा है मानसून का खतरा
भारत का बॉन्ड बाज़ार एक महत्वपूर्ण रैली का अनुभव कर रहा है, जहाँ वैश्विक तनावों में कमी और मज़बूत विदेशी निवेश के कारण यील्ड मार्च के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। हालांकि, मध्य भारत में बढ़ते मानसून घाटे को लेकर चिंताएँ खाद्य मुद्रास्फीति को जन्म दे सकती हैं, जिससे यह सकारात्मक बाज़ार धारणा कमज़ोर हो सकती है और घरेलू बजट प्रभावित हो सकते हैं।
पोर्टफोलियो योग: क्यों हर भारतीय निवेशक को मार्केट स्टेबिलिटी के लिए बॉन्ड्स की आवश्यकता है
अप्रत्याशित बाजार उतार-चढ़ाव के इस दौर में, एसेट एलोकेशन रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए एक महत्वपूर्ण शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कार्य करता है। हाई-ग्रोथ इक्विटी के साथ स्थिर बॉन्ड्स को संतुलित करके, निवेशक अपनी संपत्ति को अचानक वैश्विक और घरेलू झटकों से बचा सकते हैं।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: वैश्विक तेल तनाव और मानसून की आशंकाओं ने 6-दिन की तेजी पर लगाया विराम
शुक्रवार को भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई, जिससे पिछले छह दिनों की गिरावट का सिलसिला समाप्त हो गया। अमेरिका-ईरान वार्ता रुकने से तेल की कीमतों में तेजी आई। अल नीनो के मानसून पर संभावित प्रभाव और ट्रेडर्स द्वारा की गई प्रॉफिट-बुकिंग ने बाजार में नई अस्थिरता पैदा कर दी है, जिससे डेट म्यूचुअल फंड के रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं।
वैश्विक तेल कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक उम्मीदों के बीच भारतीय बॉन्ड बाजार स्थिर
ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने के कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड स्थिर रही। जहाँ अमेरिका-ईरान वार्ता की चर्चा ने ऊर्जा लागत को कम किया है, वहीं तिमाही टैक्स भुगतान के कारण घरेलू लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) कम बनी हुई है।
वैश्विक तनाव में कमी से तेल की कीमतों में गिरावट, रुपया 5 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा
पश्चिम एशिया में संभावित शांति समझौते की खबरों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारतीय रुपया पांच सप्ताह के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस बदलाव ने भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड को भी मध्य-अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है, जो घरेलू बाजारों के लिए बेहतर सेंटिमेंट का संकेत है।
RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धुंधली: भारतीय बचतकर्ताओं के लिए क्यों बनी रह सकती है FD और बॉन्ड पर ऊंची यील्ड
महंगाई के जोखिम ऊंचे बने रहने के कारण ब्याज दरों में कटौती की लंबी श्रृंखला की उम्मीदें कम हो रही हैं, जिससे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और डेट फंड का रिटर्न लंबे समय तक आकर्षक बना रह सकता है। इस बीच, वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में भारत के शामिल होने से ₹2.1 लाख करोड़ ($25 billion) के विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।
ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों के आठ सप्ताह के निचले स्तर पर आने से भारतीय बॉन्ड में तेजी
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी के बाद शुक्रवार को भारत में सरकारी बॉन्ड की कीमतों में उछाल आया। बाजार में यह बदलाव एक स्थिर ब्याज दर वातावरण का संकेत देता है, जो रिटेल डेट निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
वैश्विक स्तर पर दिलचस्पी बढ़ने के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में ₹10,000 करोड़ डाले
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अपनी बिकवाली के रुझान को उलट दिया है और महज चार दिनों के भीतर भारतीय ऋण (debt) बाजारों में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश किया है। पूंजी के इस प्रवाह ने बॉन्ड यील्ड में गिरावट शुरू कर दी है, जिससे अंततः भारतीय उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।
Bond / FD returns and credit ratings are indicative and subject to issuer credit risk and interest-rate risk. Verify current terms with the issuer. Some listings may be sponsored. Not investment advice.