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बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: वैश्विक तेल तनाव और मानसून की आशंकाओं ने 6-दिन की तेजी पर लगाया विराम
शुक्रवार को भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई, जिससे पिछले छह दिनों की गिरावट का सिलसिला समाप्त हो गया। अमेरिका-ईरान वार्ता रुकने से तेल की कीमतों में तेजी आई। अल नीनो के मानसून पर संभावित प्रभाव और ट्रेडर्स द्वारा की गई प्रॉफिट-बुकिंग ने बाजार में नई अस्थिरता पैदा कर दी है, जिससे डेट म्यूचुअल फंड के रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं।
अतिरिक्त नकदी को कम करने का RBI का कदम शॉर्ट-टर्म बॉन्ड रैली को रोक सकता है, डेट फंड रिटर्न पर पड़ेगा असर
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी वापस लेने की उम्मीद है, क्योंकि लिक्विडिटी का स्तर महामारी के दौर के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच रहा है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस हस्तक्षेप से शॉर्ट-टर्म बॉन्ड में हालिया रैली रुक सकती है, जिससे डेट म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ेगा।
गिरती तेल की कीमतों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में 6-दिवसीय तेजी को दी रफ्तार
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण भारत के मुद्रास्फीति (inflation) परिदृश्य में सुधार होने से भारतीय सरकारी बॉन्ड लगातार बढ़त बना रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर कड़ा रुख अपनाने के बावजूद, विदेशी निवेशक भारतीय ऋण बाजारों में पैसा लगाना जारी रखे हुए हैं।
भारतीय सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की भारी दिलचस्पी: जानें यह आपके डेट फंड रिटर्न को कैसे बढ़ा सकता है
अनुकूल कर नियमों और स्थिर रुपये के कारण भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में रिकॉर्ड विदेशी पूंजी आ रही है। यह रुझान बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है, जिससे ब्याज दरों में कमी और घरेलू डेट फंड निवेशकों के लिए बेहतर लाभ हो सकता है।
अमेरिकी फेड के फैसले और तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर, भारतीय बॉन्ड मार्केट में ठहराव
भारतीय सरकारी बॉन्ड में हालिया तेजी थम गई है क्योंकि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति घोषणा से पहले सतर्क हो गए हैं। स्थिर होती वैश्विक तेल की कीमतें और विदेशी निवेश के रुझानों में संभावित बदलाव के कारण बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड (yield) अब 12-सप्ताह के निचले स्तर के करीब बनी हुई है।
ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने से भारतीय ऋण बाजार (Debt Market) को ₹2.1 लाख करोड़ का बूस्ट मिलने की उम्मीद
नियामकीय सुधारों और ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने के साथ भारत का बॉन्ड मार्केट बड़े पूंजी निवेश के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि $25 बिलियन तक का नया विदेशी निवेश आ सकता है, जिससे सरकार और कॉरपोरेट्स दोनों के लिए उधारी की लागत कम हो सकती है।
RBI के डेट मार्केट सुधारों से आ सकता है $100 बिलियन का विदेशी निवेश: Invesco MF
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश नियमों को आसान बनाने के निर्णय से सरकारी बॉन्ड में वैश्विक पूंजी की एक बड़ी लहर आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रुपये में स्थिरता आएगी और भारतीय उपभोक्ताओं व व्यवसायों के लिए ऋण लागत कम हो सकती है।
कर्जदारों के लिए अच्छी खबर: विदेशी निवेश के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड में 0.10% की गिरावट
नए टैक्स राहत के बाद विदेशी निवेशकों द्वारा खरीदारी बढ़ाने से भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में 0.10% की गिरावट आई है। यील्ड में यह गिरावट आमतौर पर होम और कार लोन के लिए कम ब्याज दरों का संकेत देती है, साथ ही यह डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के रिटर्न को भी बढ़ाती है।
वैश्विक स्तर पर दिलचस्पी बढ़ने के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में ₹10,000 करोड़ डाले
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अपनी बिकवाली के रुझान को उलट दिया है और महज चार दिनों के भीतर भारतीय ऋण (debt) बाजारों में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश किया है। पूंजी के इस प्रवाह ने बॉन्ड यील्ड में गिरावट शुरू कर दी है, जिससे अंततः भारतीय उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।
वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट के चलते भारतीय बॉन्ड मार्केट 7-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुँचा
कच्चे तेल की कीमतों में कमी और विदेशी निवेश में उछाल ने भारतीय बॉन्ड की कीमतों को पिछले लगभग दो महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँचा दिया है। यह बदलाव घरेलू अर्थव्यवस्था में संभावित स्थिरता का संकेत देता है और डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के भविष्य के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है।
RBI के कदमों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार धारणा मजबूत, बॉन्ड यील्ड में कमी
भारतीय सरकारी बॉन्ड में मंगलवार को खरीदारी की गतिविधियों में तेजी देखी गई, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयास और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की गिरती कीमतें रहीं। ये घटनाक्रम डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और लंबी अवधि में कर्जदारों के लिए संभावित राहत का संकेत देते हैं।
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