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भारतीय सरकारी बॉन्ड ने जून में देखी ऐतिहासिक तेज़ी: इसका आपके बटुए के लिए क्या मतलब है
भारतीय सरकारी बॉन्ड ने जून में एक महत्वपूर्ण तेज़ी का अनुभव किया, जिसकी विशेषता बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड में सात वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट थी। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेश में वृद्धि ने इस तेज़ी को बढ़ावा दिया, जिससे आपके लिए ऋण और जमा ब्याज दरों में संभावित बदलाव हो सकते हैं।
कैप्री ग्लोबल की $500 मिलियन के वैश्विक बॉन्ड जारी करने की योजना, विदेशी पूंजी जुटाने वाले NBFCs की कतार में शामिल
कैप्री ग्लोबल कैपिटल अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पहल की योजना बना रहा है, जिसका लक्ष्य विदेशी बॉन्ड के माध्यम से $300-500 मिलियन जुटाना है। यह कदम भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के बीच एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाता है, जो अपनी ऋण क्षमता का विस्तार करने और व्यापक ऋण बाजार को मजबूत करने के लिए विविध वैश्विक वित्तपोषण स्रोतों की तलाश कर रही हैं।
वैश्विक शांति के बीच भारतीय बॉन्ड में तेज़ी, लेकिन खाद्य कीमतों पर मंडरा रहा है मानसून का खतरा
भारत का बॉन्ड बाज़ार एक महत्वपूर्ण रैली का अनुभव कर रहा है, जहाँ वैश्विक तनावों में कमी और मज़बूत विदेशी निवेश के कारण यील्ड मार्च के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। हालांकि, मध्य भारत में बढ़ते मानसून घाटे को लेकर चिंताएँ खाद्य मुद्रास्फीति को जन्म दे सकती हैं, जिससे यह सकारात्मक बाज़ार धारणा कमज़ोर हो सकती है और घरेलू बजट प्रभावित हो सकते हैं।
विदेशी निवेश और सस्ते तेल से मिली राहत, रुपये ने 11 हफ्तों में अपना सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन किया
भारतीय रुपया लगभग तीन महीनों में अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन पर पहुंच गया है, जिसे महत्वपूर्ण विदेशी निवेश और वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट से समर्थन मिला है। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करता है, जिससे आयात और विदेशी शिक्षा की लागत कम होने की संभावना है।
वैश्विक निवेशकों ने अमेरिकी संपत्तियों में ₹8.58 लाख करोड़ डाले: भारतीय पोर्टफोलियो पर प्रभाव
विदेशी निवेशकों ने अप्रैल में अमेरिकी दीर्घकालिक प्रतिभूतियों (long-term securities) में $103 बिलियन (₹8.58 लाख करोड़) से अधिक जोड़े, जो अमेरिकी बाजारों में उच्च विश्वास का संकेत है। मांग में इस उछाल का सीधा प्रभाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारतीय निवेशकों के पास मौजूद अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर पड़ता है।
अमेरिकी बाजारों में 1% से अधिक की गिरावट, फेड ब्याज दर बढ़ने के डर से; भारतीय निवेशक निकासी (Outflows) के लिए तैयार
फेडरल रिजर्व द्वारा मुद्रास्फीति (inflation) से लड़ने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत देने के बाद प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में भारी गिरावट आई। इस 'हॉकिश' (कड़े) रुख से भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली की आशंका है और इससे रुपये पर नया दबाव पड़ सकता है।
रुपया छह हफ्ते के उच्चतम स्तर पर: गिरती तेल की कीमतें और RBI के कदम कैसे बचा रहे हैं आपके पैसे
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और RBI के स्मार्ट नीतिगत बदलावों के कारण भारतीय रुपया एक महीने से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। आम आदमी के लिए, एक मजबूत मुद्रा बढ़ती ईंधन लागत और आयातित मुद्रास्फीति के खिलाफ ढाल का काम करती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत बदलाव की प्रतीक्षा में अमेरिकी डॉलर कमजोर
अमेरिकी डॉलर में गिरावट देखी जा रही है क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर आने वाले निर्णय और भू-राजनीतिक तनाव में संभावित कमी की तैयारी कर रहे हैं। 'ग्रीनबैक' (अमेरिकी डॉलर) में यह नरमी भारतीय रुपये को राहत दे सकती है और भारतीय शेयरों में विदेशी पूंजी को फिर से आकर्षित कर सकती है।
भारत ने एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत वैश्विक व्यक्तियों के लिए शेयर बाजार के दरवाजे खोले
भारत सरकार ने विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों के लिए घरेलू शेयरों को सीधे खरीदने का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि इससे बाजार में अधिक तरलता और रिटेल पोर्टफोलियो के लिए स्थिरता का वादा किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि टैक्स और अनुपालन जटिलताओं के कारण इसकी शुरुआत धीमी रहेगी।
HDFC Bank की नजर डॉलर बॉन्ड के नए इश्यू के जरिए $500 मिलियन के वैश्विक फंड जुटाने पर
भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का ऋणदाता, HDFC Bank, पांच वर्षीय डॉलर बॉन्ड जारी करके कम से कम $500 मिलियन जुटाने के लिए तैयार है। बैंक अपने वैश्विक परिचालन के लिए सस्ता अंतरराष्ट्रीय ऋण प्राप्त करने हेतु एक विशेष सब्सिडी वाली हेजिंग योजना का लाभ उठा रहा है।
शेयर बाजारों और रुपये को मजबूती देने के लिए सरकार ने विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी
भारत ने अपनी पोर्टफोलियो निवेश योजना को विदेशी व्यक्तियों और संस्थाओं के व्यापक दायरे के लिए खोल दिया है। निवेश की सीमाओं को दोगुना करने और प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाकर, इस कदम का उद्देश्य रुपये को स्थिर करना और भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में नकदी प्रवाह को बढ़ाना है।
ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने से भारतीय ऋण बाजार (Debt Market) को ₹2.1 लाख करोड़ का बूस्ट मिलने की उम्मीद
नियामकीय सुधारों और ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने के साथ भारत का बॉन्ड मार्केट बड़े पूंजी निवेश के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि $25 बिलियन तक का नया विदेशी निवेश आ सकता है, जिससे सरकार और कॉरपोरेट्स दोनों के लिए उधारी की लागत कम हो सकती है।
विदेशी निवेशकों ने जून में ₹62,800 करोड़ निकाले: रिटेल निवेशकों के लिए क्या जानना ज़रूरी है
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों में अपनी बिकवाली जारी रखी, और जून के पहले पखवाड़े में ₹62,853 करोड़ से अधिक की निकासी की। जहां वैश्विक अनिश्चितताएं इस निकास का कारण हैं, वहीं घरेलू संस्थागत समर्थन छोटे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बना हुआ है।
कच्चे तेल और मुद्रा जोखिमों के बीच भारतीय बॉन्ड्स पर ब्लैकरॉक का रुख स्थिर
वैश्विक निवेश दिग्गज ब्लैकरॉक (BlackRock) अंतरराष्ट्रीय फंडों की बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद भारतीय ऋण (debt) पर सतर्क रुख बनाए हुए है। हालांकि सरकारी सुधारों ने भारतीय बॉन्ड्स को अधिक आकर्षक बना दिया है, लेकिन उच्च हेजिंग लागत और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें विदेशी पूंजी के लिए महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई हैं।
बॉन्ड मार्केट में उछाल: फिक्स्ड इनकम रिटर्न को लॉक करने का अभी सबसे सही समय क्यों है
विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारत के हालिया नीतिगत बदलावों से सितंबर के अंत तक ब्याज दरों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। रिटेल निवेशकों के लिए, यह टारगेट मैच्योरिटी डेट फंड्स में निवेश करने और मौजूदा उच्च यील्ड (yields) के खत्म होने से पहले उन्हें सुरक्षित करने का एक छोटा सा अवसर पैदा करता है।
सरकारी कंपनियां सस्ते वैश्विक ऋण पर दे रही हैं ध्यान; बिजली और बुनियादी ढांचे की लागत हो सकती है कम
PFC और REC जैसे प्रमुख सरकारी ऋणदाता RBI की नई स्वैप विंडो का लाभ उठाने के लिए विदेशी कर्ज की ओर रुख कर रहे हैं। यह कदम उन्हें 7% से कम दरों पर फंड प्राप्त करने की अनुमति देता है, जिससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए सस्ते ऋण मिल सकते हैं।
वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट के चलते भारतीय बॉन्ड मार्केट 7-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुँचा
कच्चे तेल की कीमतों में कमी और विदेशी निवेश में उछाल ने भारतीय बॉन्ड की कीमतों को पिछले लगभग दो महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँचा दिया है। यह बदलाव घरेलू अर्थव्यवस्था में संभावित स्थिरता का संकेत देता है और डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के भविष्य के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है।
भारत की नजर वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने पर: इस कदम से ब्याज दरों में कमी और रुपये को मिल सकती है मजबूती
विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स छूट शुरू करने के बाद भारत प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों (Global Bond Indices) में शामिल होने के अपने प्रयासों को तेज कर रहा है। इसमें सफल समावेश से बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी प्रवाह होने की उम्मीद है, जिससे रुपये को स्थिर करने और सरकार तथा खुदरा उपभोक्ताओं के लिए उधारी की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।