Monetary Policy
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ताज़ाआरबीआई ने मौद्रिक नीति इनपुट के लिए प्रमुख सर्वेक्षण शुरू किए
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने आवश्यक आर्थिक डेटा एकत्र करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण शुरू किए हैं। ये जानकारी केंद्रीय बैंक के आगामी मौद्रिक नीतिगत निर्णयों को सीधे सूचित करेगी, जिससे ब्याज दरों और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ेगा।

RBI ने बैंकिंग प्रणाली की तरलता को प्रबंधित करने के लिए 30-दिवसीय VRRR नीलामी आयोजित की
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिए 30-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी का उपयोग किया है। इस कदम का उद्देश्य बैंकों के भीतर अधिशेष निधियों का प्रबंधन करना और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखना है।
ताज़ाआरबीआई ने रेपो दर स्थिर रखी; चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 6.9% रहने का अनुमान
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी प्रमुख उधार दर, रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है, जिससे वाणिज्यिक बैंकों के लिए उधार लेने की लागत में स्थिरता बनी रहेगी। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.9% रहने का मजबूत अनुमान लगाया है।

बैंक ऑफ इंग्लैंड के अर्थशास्त्री ने दर बढ़ोतरी का आग्रह किया: भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा है कि यूके में ब्याज दरें बढ़ाई जानी चाहिए। जबकि स्रोत में विशिष्ट विवरण प्रदान नहीं किए गए थे, एक प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंक द्वारा ऐसा कदम अंतर्राष्ट्रीय पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकता है और अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बाजारों और रुपये पर असर डाल सकता है।

वैश्विक बॉन्ड व्यापारी वार्श की मुद्रास्फीति चेतावनियों पर ध्यान दे रहे हैं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद
वैश्विक बॉन्ड व्यापारी वर्तमान में पूर्व अमेरिकी फेडरल रिजर्व गवर्नर केविन वार्श जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा 'मुद्रास्फीति पर कड़े रुख' को गंभीरता से ले रहे हैं। यह इंगित करता है कि बाजार के प्रतिभागी बढ़ती कीमतों का मुकाबला करने के लिए अधिक आक्रामक उपायों की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे विश्व स्तर पर उच्च ब्याज दरें हो सकती हैं। यह भावना केंद्रीय बैंक की नीतियों को प्रभावित कर सकती है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक के निर्णय भी शामिल हैं, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत और निवेश पर प्रतिफल प्रभावित होगा।
ताज़ाफेडरल रिजर्व के केविन वॉर्श ने कठोर रुख को फिर से मजबूत किया, अमेरिकी दर वृद्धि की अटकलों को हवा दी
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में लाने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई है, एक ऐसा रुख जिसने तुरंत बॉन्ड व्यापारियों को प्रभावित किया। पांच वर्षों में पहली बार, मुद्रास्फीति लगातार केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिससे अमेरिका में भविष्य की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
ताज़ाअमेरिकी फेडरल रिजर्व की बॉन्ड रणनीति और स्वतंत्रता जांच के दायरे में
अमेरिकी वित्तीय हलकों में फेडरल रिजर्व की लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड को प्रबंधित करने में सक्रिय भूमिका और बॉन्ड बाजारों पर इसके समन्वय की सीमा को लेकर एक बहस छिड़ गई है। यह चर्चा केंद्रीय बैंक की पारंपरिक स्वतंत्रता को चुनौती दे सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थिरता और निवेशक भावना पर असर पड़ सकता है।

जापान की कोर मुद्रास्फीति 1.8% पर पहुँची, ऊर्जा कीमतों के प्रभाव के बीच इस वर्ष का उच्चतम स्तर
जापान की कोर मुद्रास्फीति दर 1.8% तक पहुँच गई है, जो इस वर्ष का उच्चतम स्तर है, मुख्य रूप से बढ़ती ऊर्जा लागतों के कारण। यह आँकड़ा, जिसमें ताजे खाद्य पदार्थ शामिल नहीं हैं लेकिन ऊर्जा शामिल है, बाज़ार की उम्मीदों पर खरा उतरा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में लगातार मुद्रास्फीति के दबाव का संकेत देता है।
ताज़ाRBI MPC Q3 2026-27 में संभावित दर वृद्धि पर नज़र रख रहा है, मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) में ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर रही है। यह कदम तब उठाया जाएगा जब बढ़ती खाद्य और ईंधन की कीमतों से विशेष रूप से महत्वपूर्ण मुद्रास्फीति जोखिम उत्पन्न होंगे। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि इस अवधि के दौरान मुद्रास्फीति 5.9% तक पहुँच सकती है।

यूएस फेड मिनट्स बुधवार को अपरिवर्तित ब्याज दरों के पीछे के तर्क का विवरण देंगे
अमेरिकी फेडरल रिजर्व बुधवार को अपनी नवीनतम नीति बैठक के मिनट्स जारी करेगा, जिससे निवेशकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नीति निर्माताओं ने अमेरिकी ब्याज दरों को अपरिवर्तित क्यों रखा। यह दस्तावेज़ केंद्रीय बैंक की भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा पर सुराग तलाश रहे बाजार प्रतिभागियों के लिए महत्वपूर्ण है।

सितंबर में US Fed द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी अभी भी संभव, असहमति जताने वाले अधिकारी ने दी चेतावनी
हाल ही में मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों में गिरावट के बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक असहमति जताने वाले अधिकारी का मानना है कि सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यह रुख मुद्रास्फीति के खिलाफ निरंतर सतर्कता का संकेत देता है, जो भारत सहित वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

जेफ्री गुंडलाच: अमेरिकी बॉन्ड बाज़ार को फेड के मुद्रास्फीति से लड़ने के संकल्प पर संदेह
प्रमुख बॉन्ड निवेशक जेफ्री गुंडलाच ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड बाज़ार यह संकेत दे रहा है कि निवेशक फेडरल रिजर्व की मुद्रास्फीति से निपटने की प्रतिबद्धता को लेकर संदेह में हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड वक्र (curve) में विरोधाभासी गतिविधियां फेड के भविष्य के कार्यों के बारे में इस संदेह को उजागर करती हैं।

यूएस फेड अध्यक्ष केविन वार्श ने 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक की 2% वार्षिक मुद्रास्फीति लक्ष्य को बनाए रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति का इस स्तर से ऊपर कोई निहित मुद्रास्फीति लक्ष्य नहीं है, और मुख्य मुद्रास्फीति गतिशीलता को समझने पर इसका ध्यान केंद्रित है।
ताज़ाअमेरिकी फेड दर वृद्धि अपेक्षित: भारतीय बाज़ारों के लिए इसका क्या अर्थ है
सीएनबीसी के अनुसार, वॉल स्ट्रीट इस सप्ताह के फेड के फैसले के बाद अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा जल्द ही ब्याज दर में वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक का यह संभावित कदम वैश्विक वित्तीय बाज़ारों, जिसमें भारतीय इक्विटी और बॉन्ड भी शामिल हैं, के लिए निहितार्थ हो सकता है और पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

येन में गिरावट: बैंक ऑफ जापान के गवर्नर उएदा का शुक्रवार का भाषण मुद्रा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा केंद्रीय बैंक की नीतिगत बैठक के बाद इस शुक्रवार को भाषण देने वाले हैं, जो जापानी येन के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। ट्रेडर और वैश्विक बाजार उनकी बातों पर बारीकी से नज़र रखेंगे ताकि मुद्रा के कमजोर होने की प्रवृत्ति को दूर करने के लिए संभावित उपायों के संकेत मिल सकें।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बेंचमार्क दरों को 3.50%-3.75% पर बनाए रखने की उम्मीद
अमेरिकी फेडरल रिजर्व से व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही है कि वह अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50%-3.75% की सीमा में बनाए रखेगा। यह अपेक्षित निर्णय अमेरिकी मौद्रिक नीति में स्थिरता का संकेत देता है, जिसके वैश्विक वित्तीय बाजारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकते हैं।

अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा बेंचमार्क दरों को 3.50%-3.75% पर स्थिर रखने की उम्मीद
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50%-3.75% की सीमा में बनाए रखने की व्यापक रूप से उम्मीद है। यह अपेक्षित निर्णय अमेरिकी मौद्रिक नीति में स्थिरता की अवधि का संकेत देता है, जिसके वैश्विक वित्तीय बाजारों, जिसमें भारत भी शामिल है, के लिए अप्रत्यक्ष निहितार्थ हो सकते हैं।

सिंगापुर तेल-जनित मुद्रास्फीति जोखिम का मुकाबला करने के लिए मौद्रिक नीति को अलग तरीके से सख्त करता है
सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण (एमएएस) ने बढ़ती तेल कीमतों के जवाब में अपनी मौद्रिक नीति को सख्त कर दिया है, जो मुद्रास्फीति के जोखिमों को फिर से बढ़ा रही हैं। अधिकांश केंद्रीय बैंकों के विपरीत जो ब्याज दरों को समायोजित करते हैं, एमएएस मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले सिंगापुर डॉलर विनिमय दर को प्रभावित करके मध्यम अवधि की मूल्य स्थिरता का प्रबंधन करता है।
ताज़ावैश्विक युद्ध और मौसम के जोखिमों के बीच RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखा; मुद्रास्फीति परिदृश्य पर अनिश्चितता
भारतीय रिजर्व बैंक तेल की बढ़ती कीमतों और अनिश्चित मौसम से सुरक्षा के लिए ब्याज दरों को स्थिर रख रहा है। भारतीय परिवारों के लिए, इसका मतलब है कि निकट भविष्य में लोन ईएमआई (EMI) और एफडी (FD) रिटर्न में बदलाव की संभावना कम है।

US Fed के नेतृत्व में बदलाव: क्यों केविन वारश का संभावित पदार्पण भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है
जैसे-जैसे केविन वारश अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के लिए एक प्रमुख उम्मीदवार के रूप में उभर रहे हैं, ब्याज दरों के प्रति उनका दृष्टिकोण वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेगा। भारतीय निवेशकों को इस बदलाव पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर विदेशी फंड प्रवाह और रुपये के मूल्य को प्रभावित करता है।

मुद्रास्फीति के डर के बीच बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को 31 साल के उच्चतम स्तर पर बढ़ाया
बैंक ऑफ जापान ने अपनी पॉलिसी ब्याज दर को बढ़ाकर 1.0 प्रतिशत कर दिया है, जो तीन दशकों से अधिक का उच्चतम स्तर है। इस रणनीतिक बदलाव का उद्देश्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटना है और यह भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

वैश्विक दरों में बदलाव: इमर्जिंग मार्केट की अस्थिरता भारतीय पोर्टफोलियो को क्यों प्रभावित कर सकती है
वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) की रणनीतियों में विभाजन पैदा हो रहा है। जैसे-जैसे कुछ देश दरों में कटौती कर रहे हैं और अन्य स्थिर बने हुए हैं, भारतीय खुदरा निवेशकों को विदेशी फंड प्रवाह में उतार-चढ़ाव और बाजार की अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए।

वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों में 0.25% की वृद्धि की
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर बढ़ाकर 2.25% कर दी है। 2023 के बाद से यह पहली बढ़ोतरी एक सख्त वैश्विक मौद्रिक रुख का संकेत देती है जो भारतीय बाजारों और FII प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।
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