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ताज़ाअमेरिकी फेडरल रिजर्व की बॉन्ड रणनीति और स्वतंत्रता जांच के दायरे में
अमेरिकी वित्तीय हलकों में फेडरल रिजर्व की लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड को प्रबंधित करने में सक्रिय भूमिका और बॉन्ड बाजारों पर इसके समन्वय की सीमा को लेकर एक बहस छिड़ गई है। यह चर्चा केंद्रीय बैंक की पारंपरिक स्वतंत्रता को चुनौती दे सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थिरता और निवेशक भावना पर असर पड़ सकता है।

सितंबर में US Fed द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी अभी भी संभव, असहमति जताने वाले अधिकारी ने दी चेतावनी
हाल ही में मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों में गिरावट के बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक असहमति जताने वाले अधिकारी का मानना है कि सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यह रुख मुद्रास्फीति के खिलाफ निरंतर सतर्कता का संकेत देता है, जो भारत सहित वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
ताज़ासोने की कीमतें वैश्विक स्तर पर नरम हुईं, अमेरिकी मुद्रास्फीति में कमी और फेड दर स्थिर रहने की उम्मीदें
अमेरिकी मुद्रास्फीति में कमी का संकेत देने वाले नए आंकड़ों के बाद वैश्विक सोने की कीमतें नरम हो गई हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। यह विकास एक निवेश के रूप में सोने की अपील को प्रभावित करता है और भारत में घरेलू सोने की दरों के लिए इसके निहितार्थ हैं।

जेफ्री गुंडलाच: अमेरिकी बॉन्ड बाज़ार को फेड के मुद्रास्फीति से लड़ने के संकल्प पर संदेह
प्रमुख बॉन्ड निवेशक जेफ्री गुंडलाच ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड बाज़ार यह संकेत दे रहा है कि निवेशक फेडरल रिजर्व की मुद्रास्फीति से निपटने की प्रतिबद्धता को लेकर संदेह में हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड वक्र (curve) में विरोधाभासी गतिविधियां फेड के भविष्य के कार्यों के बारे में इस संदेह को उजागर करती हैं।
ताज़ाअमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने 29 जुलाई को दरें स्थिर रखीं: भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने 29 जुलाई को अपनी ब्याज दरें अपरिवर्तित रखीं, एक ऐसा कदम जो भारत से विदेशी पूंजी के बहिर्प्रवाह को संभावित रूप से कम कर सकता है और भारतीय रुपये को मजबूत कर सकता है। हालांकि, वैश्विक मुद्रास्फीति जोखिम और चल रहे भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों के लिए चुनौतियां पेश करते रहेंगे।

ग्लोबल चिप बिकवाली से उभरते बाज़ार 3 महीने के निचले स्तर पर; अमेरिकी फेड का फैसला नजदीक
सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली से एशियाई शेयर बाज़ारों पर दबाव बढ़ा है, जिससे उभरते बाज़ार के शेयरों का बेंचमार्क तीन महीने से ज़्यादा के निचले स्तर पर पहुँच गया है। इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के महत्वपूर्ण ब्याज दर के फैसले का इंतजार करते हुए वैश्विक मुद्राओं का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है।

प्रमुख फेड बैठक से पहले अमेरिकी बाजारों में बढ़त: भारतीय निवेशकों को केविन वॉर्श पर नजर क्यों रखनी चाहिए
बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी देखी गई, क्योंकि एक महत्वपूर्ण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों ने रिकवरी का नेतृत्व किया। यह नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में ब्याज दर का पहला निर्णय है, जो वैश्विक निवेशकों और भारतीय पूंजी प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।

US Fed अपडेट: ब्याज दरें स्थिर रहने के साथ ही ट्रंप ने चेयर वॉर्श का समर्थन किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेड चेयरमैन केविन वॉर्श पर भरोसा जताया है, जो उनके पिछले आलोचनात्मक रुख से एक बड़ा बदलाव है। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है, लेकिन भविष्य में संभावित बढ़ोतरी के संकेतों से भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

सोने की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट: क्या यह भारतीय निवेशकों के लिए खरीदारी का एक रणनीतिक मौका है?
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों के कारण वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में नरमी आ रही है। भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए, कीमतों में यह गिरावट साल के अंत में होने वाली संभावित तेजी से पहले सोने को जमा करने का एक रणनीतिक मौका हो सकती है।

Fed द्वारा एक और रेट हाइक का संकेत देने से अमेरिकी डॉलर में उछाल; रुपये और सोने पर संभावित प्रभाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए इस साल के अंत में एक और बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। इस सख्त रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है और भारत के शेयर और सोना बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा: चेयरमैन केविन वॉर्श का नया रुख भारत के लिए क्या मायने रखता है
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है, लेकिन नए चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में मुद्रास्फीति (inflation) पर सख्त रुख का संकेत दिया है। यह 'हॉकिश' (hawkish) बदलाव भारत में ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकता है और स्थानीय बाजारों में विदेशी फंड के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नजर AI के प्रभाव पर: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या हैं मायने
अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस बात का बारीकी से परीक्षण कर रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उसकी अर्थव्यवस्था को कैसे बदल सकता है, जो उत्पादकता, विकास और मुद्रास्फीति को प्रभावित करेगा। हालांकि यह अध्ययन अमेरिका पर केंद्रित है, लेकिन AI द्वारा संचालित ये वैश्विक बदलाव अंततः भारत के आर्थिक भविष्य और नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।
ताज़ावैश्विक संकेतों से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट: भारतीय खरीदारों के लिए शादी के सीजन में खरीदारी का मौका
यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत से MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। गर्मियों की शादियों के सीजन के बीच भारतीय परिवारों के लिए, यह गिरावट कम कीमत पर आभूषण खरीदने का एक मौका प्रदान करती है।

बाज़ार में 4 दिनों की तेजी पर लगा ब्रेक; अमेरिकी फेड ने उच्च ब्याज दरों के दिए संकेत
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की तेजी थम गई। जहां निफ्टी 24,050 से नीचे फिसल गया, वहीं व्यापक बाजार की धारणा छोटे शेयरों में सकारात्मक वृद्धि के साथ स्थिर बनी हुई है।
ताज़ाअमेरिकी फेड द्वारा और ब्याज दर वृद्धि के संकेतों के बाद सोने की कीमतों में गिरावट: क्या भारतीय खरीदारों के लिए यह एक अवसर है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल के अंत में ब्याज दरों में फिर से वृद्धि के संकेत देने के बाद सोने की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट आई। इस 'हॉकिश' रुख (सख्त रुख) ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया है, जिससे वैश्विक और भारतीय घरेलू बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार (करेक्शन) हुआ है।

अमेरिकी फेड के फैसले और तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर, भारतीय बॉन्ड मार्केट में ठहराव
भारतीय सरकारी बॉन्ड में हालिया तेजी थम गई है क्योंकि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति घोषणा से पहले सतर्क हो गए हैं। स्थिर होती वैश्विक तेल की कीमतें और विदेशी निवेश के रुझानों में संभावित बदलाव के कारण बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड (yield) अब 12-सप्ताह के निचले स्तर के करीब बनी हुई है।

2024 के लिए अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म; UBS का अनुमान, 2027 तक नहीं मिलेगी कोई राहत
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट दिग्गज UBS ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की अपनी उम्मीदों को काफी आगे बढ़ा दिया है, और अनुमान लगाया है कि ब्याज दरें 2027 तक ऊंची बनी रहेंगी। 'हायर-फॉर-लॉन्गर' (लंबे समय तक उच्च दरें) शासन की ओर यह बदलाव महंगे कर्ज की लंबी अवधि और भारतीय बाजारों के लिए संभावित अस्थिरता का संकेत देता है।

US Fed के तनाव से वैश्विक बाजारों में गिरावट; टेक शेयरों में बिकवाली से एशियाई सूचकांकों पर दबाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठक से पहले निवेशकों की सावधानी के चलते एशियाई बाजारों ने वॉल स्ट्रीट की गिरावट का अनुसरण किया। हालांकि तेल की गिरती कीमतों ने मुद्रास्फीति से कुछ राहत दी है, लेकिन अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर अनिश्चितता विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही है।

निवेशकों की नजर अगली चाल के लिए US Fed की बैठक पर, Bitcoin ₹54.7 लाख के करीब
बड़े संस्थानों की दिलचस्पी कम होने के संकेतों के बीच Bitcoin $65,600 के स्तर के आसपास एक सीमित ट्रेडिंग रेंज में फंसा हुआ है। भारतीय निवेशक अब अपना ध्यान आगामी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर केंद्रित कर रहे हैं, जिससे उच्च-जोखिम वाली संपत्तियों (high-risk assets) के लिए दिशा तय होने की उम्मीद है।

US Fed की बैठक और तेल की कीमतों में बदलाव: इस सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
जैसे-जैसे अमेरिकी बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, सभी की निगाहें फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठक और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर टिकी हैं। ये वैश्विक कारक भारतीय मुद्रास्फीति, रुपये की वैल्यू और अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड के रिटर्न को प्रभावित करने के लिए तैयार हैं।

भू-राजनीतिक तनाव के कारण मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर अनिश्चितता के बीच वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें स्थिर रखीं
अमेरिका के फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा इस सप्ताह ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने की उम्मीद है। ईरान संघर्ष के 100 दिन पूरे होने से मुद्रास्फीति का जोखिम बना हुआ है, जिसके चलते नीति निर्माता कटौती करने से पहले 'प्रतीक्षा करें और देखें' (wait and watch) का रुख अपना रहे हैं।

अमेरिकी फेड का नया नेतृत्व: भारतीय निवेशकों को बाजार में बदलाव के लिए क्यों तैयार रहना चाहिए
अमेरिकी फेडरल रिजर्व केविन वॉर्श की अध्यक्षता में एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है। भारतीय रिटेल निवेशकों को इस बदलाव पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों के फैसले सीधे दलाल स्ट्रीट में विदेशी फंडों के प्रवाह को निर्धारित करते हैं।
ताज़ासोने और चांदी की कीमतों को लगा झटका, क्योंकि अमेरिकी फेड रेट में कटौती की उम्मीदें हुईं धुंधली
पिछले एक साल में कीमती धातुओं में देखी गई भारी तेजी अब थमती नजर आ रही है, क्योंकि बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति ने अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित कटौती में देरी कर दी है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय निवेशकों को कीमतों में गिरावट के दौर के लिए तैयार रहना चाहिए।

अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोने की कीमतों में गिरावट; भारतीय मांग सुस्त रही
खाड़ी में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, निवेशकों द्वारा अमेरिका में संभावित ब्याज दर वृद्धि की तैयारी के बीच सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई। भारत में, खुदरा खरीदार 'वेट-एंड-वॉच' का रुख अपना रहे हैं क्योंकि भारी उतार-चढ़ाव के कारण वर्तमान दरें आकर्षक नहीं लग रही हैं।
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