औषधि नियामक ने नेशनल फ़ॉर्म्युलरी ऑफ़ इंडिया में अस्वीकृत दवाओं पर मांगा जवाब

Source: ET Real Estate
भारत के औषधि नियामक, DCGI ने इंडियन फ़ार्माकोपिया कमीशन (IPC) से नेशनल फ़ॉर्म्युलरी ऑफ़ इंडिया (NFI 2026) के नवीनतम संस्करण में कई अस्वीकृत दवाओं को शामिल करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। यह विसंगति दवा सुरक्षा और चिकित्सा पेशेवरों के लिए आधिकारिक मार्गदर्शन के बारे में चिंताएं बढ़ाती है, जबकि हितधारकों ने इसके ऑनलाइन संस्करण की अनुपलब्धता का भी उल्लेख किया है।
- ▸India's top drug regulator has flagged unapproved medicines listed in an official medical reference guide, NFI 2026.
- ▸The inclusion of unapproved drugs in the National Formulary of India (NFI) raises concerns about patient safety and the reliability of medical guidance.
- ▸The Drug Controller General of India (DCGI) has sought an explanation from the Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) regarding this serious discrepancy.
- ▸Healthcare professionals also face issues with the unavailability of the online version of NFI 2026.
- ✓India's top drug regulator has flagged unapproved medicines listed in an official medical reference guide, NFI 2026.
- ✓The inclusion of unapproved drugs in the National Formulary of India (NFI) raises concerns about patient safety and the reliability of medical guidance.
- ✓The Drug Controller General of India (DCGI) has sought an explanation from the Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) regarding this serious discrepancy.
- ✓Healthcare professionals also face issues with the unavailability of the online version of NFI 2026.
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI) ने नेशनल फ़ॉर्म्युलरी ऑफ़ इंडिया (NFI 2026) के नवीनतम संस्करण के बारे में गंभीर चिंताएं जताई हैं, जिसमें कथित तौर पर कई ऐसी दवाएं शामिल हैं जिन्हें सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने मंज़ूरी नहीं दी है। इन विसंगतियों के जवाब में, DCGI ने इंडियन फ़ार्माकोपिया कमीशन (IPC) को औपचारिक रूप से सूचित किया है और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
नेशनल फ़ॉर्म्युलरी ऑफ़ इंडिया देश भर के चिकित्सा चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में कार्य करता है, जो दवाओं, उनके फ़ॉर्मूलेशन, खुराक और उपयोग पर व्यापक जानकारी प्रदान करता है। इसका प्राथमिक लक्ष्य दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना और उपचार प्रोटोकॉल को मानकीकृत करना है। इसलिए, इस तरह के एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका में अस्वीकृत दवाओं को शामिल करना जन स्वास्थ्य और रोगी सुरक्षा के लिए संभावित जोखिम पैदा करता है, क्योंकि यह अनजाने में ऐसी दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन और उपयोग का कारण बन सकता है, जिन्होंने आवश्यक कठोर नियामक जांच और अनुमोदन प्रक्रियाओं से नहीं गुज़रा है।
प्रमुख संस्थाओं को समझना
- ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI): यह सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) का प्रमुख है, जो भारत में नई दवाओं के अनुमोदन, क्लिनिकल ट्रायल और दवा निर्माण, बिक्री व आयात के मानकों को निर्धारित करने के लिए ज़िम्मेदार है।
- सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO): यह फ़ार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए भारत का प्रमुख नियामक निकाय है, जो दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करता है।
- इंडियन फ़ार्माकोपिया कमीशन (IPC): यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्था है। यह इंडियन फ़ार्माकोपिया और नेशनल फ़ॉर्म्युलरी ऑफ़ इंडिया प्रकाशित करके भारत में दवाओं के लिए मानक स्थापित करने और दवाओं की गुणवत्ता व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार है।
मूल मुद्दा इस तथ्य के इर्द-गिर्द घूमता है कि NFI जैसे किसी आधिकारिक फ़ॉर्म्युलरी में सूचीबद्ध किसी भी दवा को आम तौर पर सभी नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने वाला माना जाता है, जिसमें CDSCO से अनुमोदन भी शामिल है। DCGI द्वारा IPC से की गई पूछताछ एक गंभीर चूक को उजागर करती है, यदि CDSCO की मंज़ूरी के बिना दवाओं को वास्तव में NFI 2026 में शामिल किया गया है।
नियामक चिंताओं के अलावा, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के हितधारकों ने NFI 2026 के ऑनलाइन संस्करण की अनुपलब्धता के संबंध में भी शिकायतें उठाई हैं। आज के डिजिटल युग में, ऐसी आवश्यक जानकारी तक आसान और त्वरित पहुंच स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए सूचित निर्णय लेने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन संस्करण की अनुपस्थिति मामलों को और जटिल बनाती है, जिससे फ़ॉर्म्युलरी की पहुंच और उपयोगिता सीमित हो सकती है, खासकर जब ऐसी महत्वपूर्ण अशुद्धियों की सूचना दी जा रही हो।
IPC को DCGI की पूछताछ के परिणाम पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी, क्योंकि इसका भारत में दवा विनियमन, पेशेवर चिकित्सा मार्गदर्शन और अंततः जन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हो सकता है। यह सुनिश्चित करना कि सभी सूचीबद्ध दवाएं ठीक से जांची गई और अनुमोदित हैं, देश के फार्मास्युटिकल मानकों में विश्वास बनाए रखने के लिए मौलिक है।
यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे चिकित्सा या पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से सलाह लें।
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Frequently Asked Questions
What is the National Formulary of India (NFI)?
The National Formulary of India is a key reference book for medical professionals, providing essential information about drugs, their uses, dosages, and formulations to promote rational medicine use and standardize treatments across the country.
What is the concern with NFI 2026?
The latest edition, NFI 2026, reportedly lists several drugs that have not received approval from India's main drug regulatory body, the Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO). This could lead to unsafe or ineffective drugs being prescribed.
Who are DCGI and IPC and what are their roles?
The Drug Controller General of India (DCGI) heads the CDSCO, which approves drugs. The Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) is responsible for publishing the National Formulary of India and setting drug standards. DCGI is seeking an explanation from IPC regarding the unapproved drugs.
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नेशनल फॉर्मूलरी ऑफ इंडिया में अस्वीकृत दवाओं पर दवा नियामक ने मांगा जवाब
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औषधि नियामक ने भारतीय राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी में अस्वीकृत दवाओं पर स्पष्टीकरण मांगा
भारत के औषधि नियामक, DCGI ने भारतीय फ़ार्माकोपिया आयोग (IPC) से भारतीय राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी (NFI 2026) के नवीनतम संस्करण में कई अस्वीकृत दवाओं को शामिल करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। यह विसंगति दवा सुरक्षा और चिकित्सा पेशेवरों के लिए आधिकारिक मार्गदर्शन के बारे में चिंताएं बढ़ाती है, जबकि हितधारकों ने इसके ऑनलाइन संस्करण की अनुपलब्धता का भी उल्लेख किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुदरा विक्रेताओं द्वारा प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापनों पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय खुदरा विक्रेताओं और वितरकों द्वारा प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके तहत कुछ दवाओं के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। यह प्रस्तावित बदलाव मौजूदा नियमों का विस्तार करता है, जो वर्तमान में केवल फार्मास्युटिकल निर्माताओं पर लागू होते हैं, और अनुसूची H, H1 और X के तहत आने वाली दवाओं को लक्षित करता है, जिनके लिए चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है।
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